दशनामी संन्यास
आदि शंकराचार्य ने संन्यासी परम्पराओं को दस नामों में संगठित किया — गिरि, पुरी, भारती, सरस्वती आदि — जो चार आम्नाय मठों से जुड़े हैं। गिरि नाम तप के पर्वत-पथ पर चलता है।
और पढ़ेंचिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम् ॥
"चिदानन्द-स्वरूप शिव मैं ही हूँ, शिव मैं ही हूँ।" — आदि शंकराचार्य, निर्वाण षट्कम्
स्वामी चरणाश्रित गिरि संन्यासी हैं दशनामी सम्प्रदाय के, और उनकी दीक्षा हुई श्री पञ्चदशनाम जूना अखाड़ा में — शैव संन्यास परम्परा का सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा अखाड़ा। यहाँ महान धारा एक ही स्थान पर बहती है: आदि शंकराचार्य की परम्परा, जूना अखाड़े की नागा विरासत, काश्मीर शैव दर्शन का त्रिक, तथा स्वर योग का श्वास-विज्ञान — शास्त्र, सबके लिए खुली साधनाएँ, निर्देशित ध्यान और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के साथ।
आदि शंकराचार्य की संन्यास-परम्परा, जूना अखाड़े की योद्धा-तपस्वी विरासत, और काश्मीर शैव दर्शन की अद्वैत प्रत्यभिज्ञा — तीनों एक ही जीवित परम्परा में साथ-साथ धारण किए हुए।
आदि शंकराचार्य ने संन्यासी परम्पराओं को दस नामों में संगठित किया — गिरि, पुरी, भारती, सरस्वती आदि — जो चार आम्नाय मठों से जुड़े हैं। गिरि नाम तप के पर्वत-पथ पर चलता है।
और पढ़ेंशैव अखाड़ों में सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा, जिसके इष्ट हैं भगवान दत्तात्रेय। नागा साधुओं का घर, प्रत्येक कुम्भ मेले में धर्म के प्रहरी; गद्दी माया देवी, हरिद्वार में।
और पढ़ेंकाश्मीर की आदि शैव परम्परा — वसुगुप्त, सोमानन्द, उत्पलदेव, अभिनवगुप्त, क्षेमराज। सब कुछ शिव है; अपने ही आत्मा की प्रत्यभिज्ञा ही मुक्ति है।
और पढ़ेंप्रत्येक शास्त्र-पृष्ठ अपने साथ लाता है उसका इतिहास, उसकी संरचना, संस्कृत में प्रमुख श्लोक और उनका अनुवाद, सबके लिए खुली साधनाएँ, तथा उसी ग्रन्थ को समर्पित वीडियो और ऑडियो प्रवचन।
112 धारणाएँ, जो भैरव ने भैरवी से कहीं — श्वास, ध्वनि, दृष्टि और भाव के वे द्वार जो भैरव-अवस्था में खुलते हैं। त्रिक का ध्यान-ग्रन्थ।
प्रवेश कीजिएमहादेव पर्वत पर वसुगुप्त को प्रकट हुए 77 सूत्र — चैतन्यमात्मा, "चैतन्य ही आत्मा है।" तीन उन्मेषों में काश्मीर शैव दर्शन का मूल ग्रन्थ।
प्रवेश कीजिएदिव्य स्पन्दन का सिद्धान्त — स्पन्द — प्रत्येक प्रतीति, प्रत्येक भाव, प्रत्येक श्वास में चैतन्य की सूक्ष्म धड़कन। शिवसूत्र का गतिशील मुख।
प्रवेश कीजिएअभिनवगुप्त का "तन्त्रों का आलोक" — 37 आह्निक, जिनमें त्रिक का प्रत्येक उपाय, अनुष्ठान और दर्शन समाया हुआ है। शैव चिन्तन का विश्वकोशीय शिखर।
प्रवेश कीजिएशिव पार्वती को श्वास का विज्ञान सिखाते हैं — इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना और नासिकाओं में बहते पाँच तत्त्व। स्वर योग की शिक्षाओं के पीछे खड़ा शास्त्र।
प्रवेश कीजिएसहवर्ती शैव और तान्त्रिक ग्रन्थ-राशि — स्पन्द-टीकाएँ, प्रत्यभिज्ञा-ग्रन्थ, आगम तथा आचार्यों की कृतियाँ — एक ही स्थान पर एकत्र।
प्रवेश कीजिएशास्त्रों के श्लोक पारम्परिक स्वर में सस्वर उच्चारित — कोई ग्रन्थ खोलिए, पाठ के साथ-साथ चलिए, और ध्वनि को अर्थ वैसे ही वहन करने दीजिए जैसे वह सदियों से करती आई है।
यह पुस्तकालय अधिकांशतः सभी साधकों के लिए निःशुल्क है। गहन निर्देशित पाठ्यक्रम, विस्तृत ध्यान और व्यक्तिगत मार्गदर्शन पीठ की सेवा को सम्बल देते हैं।
शास्त्र-प्रवचन, प्रत्येक शास्त्र से सर्वजन-साधनाएँ, सत्संग-वीडियो और प्रारम्भिक निर्देशित ध्यान — निःशुल्क, सदैव।
प्रवेश कीजिएसम्पूर्ण निर्देशित ध्यान-शृंखला — 112 धारणाएँ, स्वर-साधना पाठ्यक्रम और साधना-शिविरों के अभिलेख — सेवा-योजना वाले पंजीकृत सदस्यों के लिए।
और पढ़ेंस्वामीजी से व्यक्तिगत परामर्श — साधना-मार्गदर्शन, स्वर और ज्योतिष विवेचन — स्वर योग पीठ के परामर्श-कक्ष के माध्यम से।
परामर्श निश्चित कीजिएसत्संग की तिथियाँ, नए ध्यान, शास्त्र-प्रकाशन और जूना अखाड़े के कुम्भ मेला समागमों की सूचना पाने के लिए पंजीकरण कीजिए।