विज्ञानभैरव तन्त्र
भैरव और भैरवी का संवाद: 112 धारणाएँ — श्वास, ध्वनि, दृष्टि, भाव और विस्मय के द्वारा केन्द्र में स्थित होने की साधनाएँ। अब तक रचा गया सबसे व्यावहारिक ध्यान-ग्रन्थ, और इस परम्परा की सार्वजनिक शिक्षा का हृदय।
प्रवेश कीजिएशैव और स्वर परम्पराओं के पाँच मूल शास्त्र — प्रत्येक पृष्ठ पर उस ग्रन्थ का इतिहास और संरचना, संस्कृत में प्रमुख श्लोक और उनका अनुवाद, सबके लिए खुली साधनाएँ, तथा उसी को समर्पित वीडियो और ऑडियो प्रवचन।
भैरव और भैरवी का संवाद: 112 धारणाएँ — श्वास, ध्वनि, दृष्टि, भाव और विस्मय के द्वारा केन्द्र में स्थित होने की साधनाएँ। अब तक रचा गया सबसे व्यावहारिक ध्यान-ग्रन्थ, और इस परम्परा की सार्वजनिक शिक्षा का हृदय।
प्रवेश कीजिएवसुगुप्त को (लगभग 9वीं शती) प्रकट हुए 77 सूत्र, तीन खण्डों में — दिव्य, शक्ति-सम्पन्न और व्यष्टि उपाय। काश्मीर शैव दर्शन का मूल प्रकाश।
प्रवेश कीजिएपवित्र कम्पन का सिद्धान्त — स्पन्द पर लगभग पचास श्लोक; चैतन्य की वह धड़कन जिसे किसी भी तीव्र अनुभव की कौंध में पकड़ा जा सकता है — क्रोध, आनन्द, आतंक, विस्मय।
प्रवेश कीजिएअभिनवगुप्त की महाकृति, 37 आह्निकों में — त्रिक के दर्शन, अनुष्ठान, दीक्षा और योग की सम्पूर्ण वास्तु; और जयरथ की महती टीका उसका दीपक।
प्रवेश कीजिएशिव पार्वती को स्वर का विज्ञान सिखाते हैं — बाईं और दाईं नासिका में बहती श्वास, उसके भीतर पाँच तत्त्व, तथा उसकी धाराओं के साथ सामंजस्य में कर्म करने की कला।
प्रवेश कीजिएवह विशाल समुद्र जिसमें ये पाँच तैरते हैं — 28 शैवागम और 64 भैरवागम, प्रत्यभिज्ञा-ग्रन्थ, क्षेमराज का प्रत्यभिज्ञाहृदयम्, नाथ तथा स्वरोदय साहित्य — जिनका अध्यापन होता है पीठ के मंचों पर.
और पढ़ेंशास्त्र-अध्ययन पूरी तरह तभी खुलता है जब वह किसी जीवित गुरु के सान्निध्य में हो।