श्वास के द्वार
मोड़-बिन्दुओं पर पूर्णता और मध्य-विश्रान्ति — विज्ञानभैरव की प्रथम धारणाएँ: ध्यान को वहाँ विश्राम देना जहाँ श्वास जन्म लेती है और जहाँ वह ठहरती है। ध्यान में सबसे कोमल और सबसे गहरा प्रवेश।
प्रवेश कीजिएइस परम्परा के सार्वजनिक द्वार — निःशुल्क, शास्त्र-मूलक, और आपकी अपनी श्वास तथा चेतना में परखने योग्य। प्रत्येक साधना अपने मूल शास्त्र के पृष्ठ पर रहती है, ठीक उन्हीं श्लोकों के पास जिनसे वह निकली है।
मोड़-बिन्दुओं पर पूर्णता और मध्य-विश्रान्ति — विज्ञानभैरव की प्रथम धारणाएँ: ध्यान को वहाँ विश्राम देना जहाँ श्वास जन्म लेती है और जहाँ वह ठहरती है। ध्यान में सबसे कोमल और सबसे गहरा प्रवेश।
प्रवेश कीजिएकौन-सी नासिका बह रही है? अपनी श्वास-धारा पढ़ना सीखिए, एक ही श्वास के भीतर तीनों नाड़ियों से मिलिए, और धारा के विरुद्ध नहीं, धारा के साथ कर्म कीजिए — शिवस्वरोदय से लिया गया व्यावहारिक स्वर योग।
प्रवेश कीजिएउद्यमो भैरवः — किसी भी अनुभव का पहला क्षण, नामकरण आरम्भ होने से पहले, शुद्ध चैतन्य है। सोऽहम् का श्रवण और नर्तक-चिन्तन शिवसूत्र-शृंखला को पूर्ण करते हैं।
प्रवेश कीजिएतीव्र भाव की कौंध, दो विचारों के बीच और पहली स्वर-लहरी — स्पन्द-साधनाएँ, जो दिव्य धड़कन को ठीक वहीं खोज लेती हैं जहाँ जीवन सबसे अधिक जीवन्त है।
प्रवेश कीजिएएक ही प्रतीति में पाँच कृत्य और केन्द्र से प्रवेश — अभिनवगुप्त के समन्वय से निकले वे चिन्तन, जो साधारण प्रतीति को शिव की सम्पूर्ण विश्व-लीला में बदल देते हैं।
प्रवेश कीजिएनाद का अन्त और आकाश-दर्शन — सौन्दर्य-धारणाएँ: क्षीण होती घण्टी पर सवार होकर मौन तक जाना, और खुले आकाश में दृष्टि को तब तक विश्राम देना जब तक भीतर और बाहर का आकाश एक-दूसरे को पहचान न लें।
प्रवेश कीजिए🙏 एक सावधानी-वचन: इस पृष्ठ पर जो कुछ है वह सुरक्षित और कोमल है, और उसके लिए किसी दीक्षा की आवश्यकता नहीं। गहरी परतें — कुम्भक-सहित प्राणायाम, कुण्डलिनी-कार्य, अनुष्ठानात्मक उपाय — व्यक्तिगत रूप से सम्प्रेषित होती हैं। जब वे आपको पुकारें, तब आइए और पूछिए.